काठमाडौं — बालेन शाह नेतृत्वको मन्त्रिपरिषद् गठन भएको मात्र ११ दिनमा मन्त्रीहरूको वरीयताक्रममा ठूलो हेरफेर गरिएको छ। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेलले मङ्गलबार मर्यादाक्रम संशोधन गर्दा गृहमन्त्री सुधन गुरुङ तेस्रो नम्बरबाट पाँचौं नम्बरमा झरेका छन् भने विवादमा तानिएका श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षामन्त्री दीपक साह सबैभन्दा पुछारमा पुगेका छन्।
चैत १३ गते मन्त्रिपरिषद् गठन हुँदा मन्त्रीहरूको वरीयता यस प्रकार थियो भने २४ गते संशोधनपछि नयाँ वरीयता यस्तो छ :
नयाँ वरीयताक्रम (२४ चैत २०८२)
| क्र.सं. | मन्त्रीको नाम | पद | नयाँ वरीयता |
|---|---|---|---|
| १ | स्वर्णिम वाग्ले | अर्थमन्त्री | २ |
| २ | शिशिर खनाल | परराष्ट्रमन्त्री | ३ |
| ३ | विराजभक्त श्रेष्ठ | ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिँचाइमन्त्री | ४ |
| ४ | सुधन गुरुङ | गृहमन्त्री | ५ |
| ५ | सुनिल लम्साल | भौतिक पूर्वाधार तथा यातायातमन्त्री | ६ |
| ६ | सोविता गौतम | कानुन, न्याय तथा संसदीय मामिलामन्त्री | ७ |
| ७ | सीता वादी | महिला, बालबालिका तथा ज्येष्ठ नागरिकमन्त्री | ८ |
| ८ | प्रतिभा रावल | संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासनमन्त्री | ९ |
| ९ | निशा मेहता | स्वास्थ्य तथा जनसङ्ख्यामन्त्री | १० |
| १० | सस्मिता पोखरेल | शिक्षामन्त्री | ११ |
| ११ | खड्कराज पौडेल | पर्यटन तथा नागरिक उड्डयनमन्त्री | १२ |
| १२ | डा. विक्रम तिमल्सिना | (नाम नखुलाइएको मन्त्री) | १३ |
| १३ | गीता चौधरी | कृषि तथा पशुपंक्षी विकासमन्त्री | १४ |
| १४ | दीपक साह | श्रम, रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षामन्त्री | १५ (पुछार) |
विवादित मन्त्री पुछारमा
श्रममन्त्री दीपक साह यसअघि ठगी मुद्दामा मुछिएका थिए। अदालतबाट सफाइ पाए पनि हाल श्रीमतीलाई स्वास्थ्य बीमा बोर्डमा नियुक्ति दिलाएको भन्दै फेरि विवादमा तानिएका छन्। वरीयता हेरफेरपछि उनी मन्त्रिपरिषद्को सबैभन्दा पुछार (१५ औं नम्बर) मा पुगेका छन्।
अन्य मुख्य परिवर्तन
- गृहमन्त्री सुधन गुरुङ : तेस्रोबाट पाँचौं नम्बरमा झरे
- परराष्ट्रमन्त्री शिशिर खनाल : चौथोबाट तेस्रो नम्बरमा उक्लिए
- ऊर्जामन्त्री विराजभक्त श्रेष्ठ : छैटौंबाट चौथो नम्बरमा उक्लिए
- पर्यटनमन्त्री खड्कराज पौडेल : सातौंबाट बाह्रौं नम्बरमा झरे
- कानुनमन्त्री सोविता गौतम : बाह्रौंबाट सातौं नम्बरमा उक्लिइन्
- महिलामन्त्री सीता वादी : अन्तिमबाट आठौं नम्बरमा उक्लिइन्

सरकार गठन भएको छोटो समयमै मन्त्रीहरूको वरीयतामा यति ठूलो हेरफेर हुनुलाई राजनीतिक वृत्तमा अर्थपूर्ण मानिएको छ। केहीले यसलाई मन्त्रीहरूबीचको आन्तरिक शक्ति सन्तुलन र विवाद व्यवस्थापनसँग जोडेर हेरेका छन्।








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